मुख्यमंत्री से मुलाकात का असर : धाकड़ धामी का धाकड़ एक्शन, सैनिकों के गांव लुठियाग की 21 साल पुरानी सड़क मांग पर एक घंटे में कार्रवाई, 15 दिन में मांगी रिपोर्ट

देहरादून/रुद्रप्रयाग। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सैनिकों के गांव लुठियाग के शिष्टमंडल की मुलाकात का असर तत्काल देखने को मिला। विकासखंड जखोली के अंतर्गत स्थानीय बाजार चिरबटिया से ग्राम पंचायत लुठियाग तक स्वीकृत 5 किलोमीटर मोटर मार्ग निर्माण का मामला मुख्यमंत्री के समक्ष रखे जाने के महज एक घंटे के भीतर गढ़वाल मंडल आयुक्त कार्यालय हरकत में आ गया। आयुक्त कार्यालय ने लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता को पत्र जारी कर 15 दिनों के भीतर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए विस्तृत आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

लोक सदन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से ग्राम सभा लुठियाग के शिष्टमंडल ने शिष्टाचार भेंट कर उन्हें उत्तराखंड के इतिहास में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करने का नया कीर्तिमान स्थापित करने तथा सफल पांच वर्ष पूरे होने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने सैनिकों के गांव लुठियाग की 21 वर्षों से लंबित चिरबटिया–लुठियाग मोटर मार्ग की समस्या को विस्तार से मुख्यमंत्री के समक्ष रखा।

शिष्टमंडल में ग्राम प्रधान सुदीपा मेहरा के नेतृत्व में युवा कवि एवं पत्रकार दीपक कैन्तुरा, सैन सिंह मेहरा, नरदेव सिंह कैन्तुरा, सोकार सिंह मेहरा, पूर्व सैनिक पूरन सिंह कैन्तुरा, प्रदीप कैन्तुरा तथा पूर्व सैनिक सैन सिंह पंवार शामिल रहे।

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प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि वर्ष 2017 में मोटर मार्ग को स्वीकृति मिलने के बावजूद वन भूमि हस्तांतरण एवं अन्य विभागीय औपचारिकताओं के कारण निर्माण कार्य आज तक शुरू नहीं हो पाया है। सड़क के अभाव में ग्रामीणों, विशेषकर बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, विद्यार्थियों, किसानों और मरीजों को प्रतिदिन भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आपातकालीन स्थिति में मरीजों को कई किलोमीटर पैदल मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है, जिससे कई बार गंभीर परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं।

प्रथम विश्व युद्ध से कारगिल तक शौर्य की मिसाल है लुठियाग

लुठियाग केवल एक गांव नहीं, बल्कि वीर सैनिकों की धरती है। इस गांव ने देश की रक्षा के लिए पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपने वीर सपूतों का सर्वोच्च बलिदान दिया है। प्रथम विश्व युद्ध में गांव के वीर सैनिक देव सिंह कैंतुरा और रति सिंह कैंतुरा ने 39वीं गढ़वाल राइफल्स में रहते हुए अद्वितीय वीरता का परिचय देते हुए मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्योछावर किए। दोनों वीरों के नाम आज भी फ्रांस स्थित न्यूव-शापेल मेमोरियल में स्वर्णाक्षरों में अंकित हैं।

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इसके बाद 1999 के कारगिल युद्ध में गांव के वीर सपूत शहीद मुरारी सिंह कैंतुरा ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। वर्तमान में भी गांव के अनेक युवा भारतीय सेना में राष्ट्र सेवा कर रहे हैं तथा बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक गांव में निवास करते हैं। यही कारण है कि लुठियाग पूरे उत्तराखंड में “सैनिकों का गांव” के रूप में सम्मानपूर्वक जाना जाता है।

कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी भी लगातार कर रहे प्रयास

चिरबटिया–लुठियाग मोटर मार्ग के निर्माण को लेकर रुद्रप्रयाग विधायक एवं कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी भी लगातार प्रयासरत हैं। उन्होंने इस सड़क के शीघ्र निर्माण के लिए शासन और संबंधित विभागों के स्तर पर लगातार पैरवी की है। प्रतिनिधिमंडल ने भी मुख्यमंत्री को इस संबंध में मंत्री भरत सिंह चौधरी द्वारा किए जा रहे प्रयासों से अवगत कराया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल गढ़वाल मंडल आयुक्त को आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद आयुक्त कार्यालय ने एक घंटे के भीतर ही लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता को पत्र जारी कर 15 दिनों के भीतर आवश्यक कार्रवाई कर विस्तृत आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इस त्वरित कार्रवाई को ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री की संवेदनशील और निर्णायक कार्यशैली का परिचायक बताया।

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ग्रामवासियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी तथा गढ़वाल मंडल आयुक्त का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि 21 वर्षों से लंबित चिरबटिया–लुठियाग मोटर मार्ग का सपना अब शीघ्र साकार होगा। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक सड़क नहीं, बल्कि देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान, सीमांत क्षेत्र के विकास तथा आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य से जुड़ा हुआ विषय है। अब पूरे गांव की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 15 दिनों के भीतर विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद वर्षों से लंबित सड़क निर्माण कार्य धरातल पर कब शुरू होता है।

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