मुख्य निर्वाचन अधिकारी को दी चेतावनी; मतदाता सूचियों में फर्जीवाड़े के खिलाफ सड़क से अदालत तक लड़ेंगे आर-पार की लड़ाई,उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक मनोज रावत के नेतृत्व में पार्टी के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने आज मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) से मुलाकात कर मतदाता सूचियों में की जा रही भारी धांधलियों और विसंगतियों के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया। पूर्व विधायक मनोज रावत ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-2026) प्रक्रिया की आड़ में वैध मतदाताओं के नाम साजिशन हटाए जाने पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए इसे लोकतंत्र पर सीधा और जानबूझकर किया गया हमला करार दिया।
थोक में फर्जी फॉर्म-7 का खेल चल रहा है पूर्व विधायक मनोज रावत ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि कुछ अज्ञात, बाहरी और अदृश्य ताकतों द्वारा थोक (Bulk) में फर्जी फॉर्म-7 जमा कराकर मूल निवासियों, वैध मतदाताओं और यहाँ तक कि वर्तमान विधायकों के नाम भी वोटर लिस्ट से गायब करने की बेहद शर्मनाक और सुनियोजित साजिश रची जा रही है।फर्जी शिकायतकर्ताओं का भांडाफोड़ होना चाहिए,मनोज रावत ने सबूत पेश करते हुए बताया कि कांग्रेस की जमीनी जांच में यह साबित हो चुका है कि जिन लोगों के नाम से आपत्तियां दर्ज हैं, उन्होंने ऐसी कोई शिकायत ही नहीं की थी। कई कथित शिकायतकर्ताओं ने लिखित हलफनामा देकर साफ कर दिया है कि उनके फर्जी हस्ताक्षर और नाम का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। नियमों की धज्जियां उड़ाने की खुली छूट मिली है चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक कोई भी व्यक्ति अधिकतम 5 आपत्तियां ही दे सकता है। इसके विपरीत, राज्य में एक-एक फर्जी नाम और आईडी से सैकड़ों-हजारों आपत्तियां दर्ज कर पूरी चुनावी निष्पक्षता को बंधक बना लिया गया है।उधम सिंह नगर में १ लाख से ज्यादा नामों पर डाका डाल उधम सिंह नगर जिले में ‘डेमोग्राफिकली/फोटो सिमिलर एंट्रीज’ (DSE/PSE) प्रक्रिया का डर दिखाकर करीब 1,02,793 मतदाताओं के नामों को संदिग्ध बताकर हटाने की गुप्त साजिश चल रही है, जिसकी लिखित जानकारी राजनीतिक दलों को तक नहीं दी गई।पूर्व विधायक मनोज रावत ने कहा कि उत्तराखंड में जनता के मताधिकार को छीनने और चुनावों को प्रभावित करने के लिए सरकारी मशीनरी के संरक्षण में यह पूरा खेल खेला जा रहा है। वोटर लिस्ट से वैध नागरिकों का नाम बिना किसी ठोस आधार के मनमाने ढंग से काटना सीधे तौर पर लोकतंत्र की हत्या है। कांग्रेस ऐसी तानाशाही और प्रशासनिक मिलीभगत को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी। नई दिल्ली में केंद्रीय चुनाव आयोग के बाहर हमारे भारी विरोध प्रदर्शन के बाद आज प्रदेश चुनाव आयोग को झुकना पड़ा है और उन्होंने हमें बात करने का समय दिया है। हम साफ चेतावनी देना चाहते हैं कि यदि 15 सितंबर 2026 को होने वाले अंतिम प्रकाशन से पहले हर एक फर्जी आपत्ति को निरस्त नहीं किया गया और वैध मतदाताओं के नाम वापस नहीं जोड़े गए, तो कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। हम इसके खिलाफ सड़क से लेकर अदालत तक आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे और जनता के अधिकारों पर डाका डालने वालों का पर्दाफाश करेंगे।”
मनोज रावत द्वारा मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपनी मांगों को रखा। जब तक इस पूरे फर्जीवाड़े की निष्पक्ष जांच और सत्यापन नहीं हो जाता, तब तक फॉर्म-7 के तहत नाम हटाने की पूरी कार्यवाही को तुरंत सस्पेंड किया जाए।सख्त कानूनी नोटिस अनिवार्य होना चाहिए जिन भी मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश है, उन्हें फॉर्म 13 और 14 के तहत अनिवार्य रूप से व्यक्तिगत रूप से कानूनी नोटिस तामील कराया जाए और बिना सुनवाई के कोई नाम न कटे।स्वतंत्र जांच और ऑडिट होना चाहिए सभी विवादित कटौतियों और फर्जी आपत्तियों की किसी स्वतंत्र उच्च स्तरीय एजेंसी से गहन जांच और ऑडिट कराई जाए। प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से प्रदेश महामंत्री संघटन राजेंद्र भंडारी,उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना , सुजाता पॉल, प्रदेश प्रवक्ता डॉ प्रतिमा सिंह, महानगर अध्यक्ष डॉ जसविंदर सिंह गोगी शामिल रहे।
